Wo dard hi kya jo Ankho se bah jaye

वो दर्द ही क्या जो आँखों से बह जाए,
वो खुशी ही क्या जो होठों पे रह जाए,
कभी तो समझो मेरी खामोशी को,
वो बात ही क्या जो लफ्ज़ आसानी से कह जायें

एक दर्द की दुनिया हे इधर देख तो ले,
कूछ और नही कहते मगर देख तो ले,
जिस दिल को तेरे गम ने किया दिल-ए-इश्क़
उस दिल की तरफ एक नज़र देख तो ले…

मुश्किले इंसान का हौसला आजमाती है
ख्वाब का परदा आँखो से हटाती है
गिर गिर कर संभल ए आदमी
ठोकरे इंसान को जीना सिखाती है!

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.